राहुल गांधी को ‘दिमागी माओवादी’ बोल गए सुधांशु त्रिवेदी, इधर दिल्ली कूच कर गई छत्तीसगढ़ कांग्रेस; सियासत गरमाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में शुक्रवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव के दो अलग-अलग दृश्य दिखाई दिए। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने रायपुर में राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘दिमागी माओवादी’ तक कह दिया। उन्होंने कांग्रेस पर समाज में फूट डालकर सत्ता हासिल करने की राजनीति करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
एक तरफ भाजपा ने कांग्रेस की चुनावी राजनीति, EVM और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाने के तरीके को निशाने पर लिया, तो दूसरी तरफ कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता अधिकारों के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में है।

सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर सीधा हमला
रायपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की राजनीति पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य समाज में आपसी फूट डालकर सत्ता हासिल करना और उसका लाभ उठाना रहा है।
राहुल गांधी की कार्यशैली और विरोध के तरीकों पर टिप्पणी करते हुए त्रिवेदी ने उन्हें ‘दिमागी माओवादी’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करती है।

भाजपा सांसद ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम लेते हुए पंजाब की राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल ने वहां भी इसी तरह की राजनीति की थी और इसी वजह से उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।
EVM पर सवाल, बैलेट पेपर के नतीजों का भी दिया हवाला
त्रिवेदी ने कांग्रेस के EVM विरोध और SIR पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने हाल में चार राज्यों में हुए विधान परिषद चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब चुनाव बैलेट पेपर से हुए, तब भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिली।
भाजपा सांसद का तर्क था कि कांग्रेस चुनावी नतीजों के बाद कभी EVM तो कभी मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। उन्होंने इसे पार्टी की विरोधाभासी राजनीति बताया। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को अपने संगठन और राजनीतिक प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए।
त्रिवेदी ने भारत की आर्थिक और वैश्विक स्थिति का जिक्र करते हुए यह आशंका भी जताई कि देश की बढ़ती ताकत और विकास की रफ्तार को रोकने के लिए कुछ ताकतें प्रयास कर सकती हैं। उन्होंने कांग्रेस पर ऐसे माहौल में देश की संस्थाओं को लेकर अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाया।
दिल्ली में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, चरणदास महंत समेत नेता रवाना
भाजपा के हमलों के बीच छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी शुक्रवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली प्रस्तावित है। इसमें शामिल होने के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता रवाना हुए।
कांग्रेस इस रैली के जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल हैं। भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक बताती रही है।
कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली पहुंचने के लिए अलग-अलग माध्यम अपनाए। कुछ नेता विमान से रवाना हुए, जबकि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने रेल और सड़क मार्ग से जाने की तैयारी की।
विशेष ट्रेन नहीं मिली तो दूसरे इंतजाम
दिल्ली जाने वाले कार्यकर्ताओं की यात्रा को लेकर रेलवे की विशेष ट्रेन का मुद्दा भी सामने आया। कांग्रेस नेता श्रीकुमार मेनन के मुताबिक, पार्टी ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने के लिए रेलवे प्रशासन से विशेष ट्रेन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, लेकिन यह सुविधा नहीं मिली।
इसके बाद पार्टी को यात्रा के वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। कुछ नेता विमान से रवाना हुए, जबकि कार्यकर्ताओं ने नियमित ट्रेनों और सड़क मार्ग का सहारा लिया।
एक ही दिन में भाजपा का हमला और कांग्रेस का दिल्ली कूच
रायपुर में सुधांशु त्रिवेदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस नेताओं का दिल्ली रवाना होना ऐसे समय हुआ है, जब 1 नवंबर की रैली को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है। भाजपा चुनावी प्रक्रिया पर कांग्रेस के सवालों को लेकर जवाबी हमला कर रही है, वहीं कांग्रेस मतदाता अधिकारों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा लेकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में है।
अब निगाहें 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की रैली पर रहेंगी। इस मंच से उठने वाले मुद्दों और भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद सियासी टकराव का अगला दौर और तेज हो सकता है।








